11 साल तक गैरहाजिर रही शिक्षिका को मिली नई पोस्टिंग, शिक्षा विभाग के फैसले की फिर होगी जांच
बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले में एक महिला शिक्षिका को लेकर सामने आए विवाद ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि संबंधित शिक्षिका करीब 11 वर्षों तक स्कूल में अनुपस्थित रहने के बावजूद दोबारा नियुक्ति पाकर शहर के एक स्कूल में पदस्थापित कर दी गई। अब इस पूरे मामले में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने दोबारा जांच कराने के आदेश जारी किए हैं।
निदेशालय ने मामले को गंभीर मानते हुए बीकानेर संभाग के संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
शिकायत में क्या लगाए गए आरोप?
उदयरामसर निवासी संजीव यादव द्वारा की गई शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित महिला शिक्षिका पिछले लगभग 11 वर्षों से बिना किसी वैध अनुमति या सूचना के स्कूल से अनुपस्थित रही। शिकायत के अनुसार, सेवा नियमों के तहत इतनी लंबी अवधि तक गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई या सेवा समाप्ति की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
कार्रवाई के बजाय पोस्टिंग देने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी किशनदान चारण ने संबंधित शिक्षिका को राहत देते हुए बीकानेर शहर के एक प्रमुख विद्यालय में पदस्थापित कर दिया। इस निर्णय को लेकर पहले भी शिकायतें दर्ज हुई थीं और मामला जांच के दायरे में रहा है।
सचिवालय तक पहुंचा मामला
बताया जा रहा है कि यह शिकायत शासन सचिवालय, जयपुर तक पहुंचने के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया। इसके बाद संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा), बीकानेर संभाग को निष्पक्ष जांच कर निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले भी इस मामले की जांच हो चुकी है, लेकिन अब नए सिरे से जांच प्रक्रिया शुरू की गई है।
तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट
निदेशालय ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच कर तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए। यदि जांच के दौरान आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भी रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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